Katni GK History in hindi कटनी जिले का जीके

कटनी जिले के प्रमुख पर्यटक स्थल-

नमस्कार दोस्तों!

दोस्तों आज हम एक बार फिर मध्य प्रदेश के कटनी जिले के बारे में चर्चा करने वाले हैं जिसे हम जबलपुर संभाग के अंतर्गत पढ़ते हैं |यह जिला जबलपुर संभाग का ही एक जिला है जबलपुर संभाग के अंतर्गत कुल मिलाकर 8 जिले आते हैं | यहां पर आज हम कटनी जिले के अंतर्गत कौन-कौन से पर्यटक स्थल पाए जाते हैं ?यहां पर नदी का क्या महत्व है? यहां पर कौन-कौन से ऐतिहासिक धरोहर के स्थल हैं ?सभी के बारे में महत्वपूर्ण चर्चा की जाएगी | कटनी जिला चूना पत्थर का क्षेत्र है चूना पत्थर के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी हम आज आपको विस्तार से बताएंगे | कटनी जिले के अंतर्गत केन नदी का उद्गम स्थल मौजूद है आज हम केन नदी के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे कैसे केन नदी किस जिले से शुरू होती है और कहां तक जाती है |

बांधऊमर डोली बांध
किलाविजय राघव गढ़ का किला
विजय राघव गढ़ किले का निर्माण1826
पार्कस्टोन पार्क
माधवगढ़पृथ्वीराज चौहान और आल्हा ऊदल की लड़ाई के लिए प्रसिद्ध स्थल
झिंझरी गांवपाषाण काल की 14 चट्टानों के लिए प्रसिद्ध 
बहोरीबंदभगवान शिव की पांच लिंगी प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है
जैन मंदिरभगवान शांतिनाथ जैन मंदिर
भारत का भौगोलिक केन्द्रबिंदुकटनी जिले का करौंदी गांव
मोहांस मंदिर का निर्माण1984 से 1986
मां जालपा माता मंदिरघने जंगलों में प्रकट पत्थर की मूर्ति
पुराना नाममुड़वारा
जिले का निर्माण25 मई 1998
मध्य प्रदेश की चूना नगरीजिला कटनी
चक्रवर्ती सम्राट अशोक का पहला अभिलेखरूपनाथ अभिलेख कटनी
मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा सीमेंट कारखानाACC कटनी
तहसीलों की संख्या7
कमला जानमध्य प्रदेश की पहली किन्नर महापौर
प्रकाशित पत्रिकाजागृति
आईने-ए- अकबरीअबुल फजल
Katni GK History in hindi

कटनी जिले के कुछ प्रमुख पर्यटक स्थल और उनका विस्तार-

🌗 विजय राघव गढ़ का किला-

कटनी जिले के अंतर्गत आने वाला विजय राघव गढ़ का किला वास्तव में बहुत ही खूबसूरत और ऐतिहासिक किला है | किले की ऊंचाई से देखने पर नीचे का नजारा बहुत ही खूबसूरत प्रतीत होता है| विजय राघव गढ़ किले के अंदर घर बहुत ही सुंदर और खूबसूरत महल भी बना हुआ है जिसे रंगमहल के नाम से जाना जाता है | रंग महल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस महल का तापमान समय अनुसार बदलता रहता है सर्दियों के मौसम में यहां पर सूर्य की किरणें ऑटोमेटेकली खिड़कियों के रास्ते से अंदर आती हैं और कमरे का तापमान उपयुक्त बनाती हैं |

विजयराघवन किले के अंदर निवास करने वाली रानियों की जीवन शैली से संबंधित प्रत्येक व्यवस्था को मुहैया कराया जाता था उनको किसी भी प्रकार की कमी महसूस नहीं होने दी जाती थी | विजय राघव गढ़ किले के अंदर बाहर जाने के लिए एक गुप्त द्वार भी हुआ करता था जो बस्ती से सीधे बाहर निकलता था | इस प्रकार के गुप्त रास्ते का निर्माण इसी लिए किया जाता था ताकि रानियों के ऊपर किसी भी प्रकार का अत्याचार ना हो और उनको इस रास्ते से बाहर निकाला जा सके | यह किला पहाड़ पर बना हुआ है जहां पर किले के अंदर छोटा सा एक तालाब मौजूद है जिसका प्रयोग नहाने के लिए किया जाता था |

🔲 विजय राघव गढ़ किले का निर्माण-

विजय राघव गढ़ किले का निर्माण 1826 से शुरू हुआ था और कई साल एक किले के निर्माण में लगे क्योंकि यह किला बहुत ही सुरक्षित और प्रसिद्धि किला माना जाता है | विजय राघौगढ़ किला ओर से नदियों के द्वारा गिरा हुआ है और तीसरी तरफ से विशाल जंगल और पहाड़ इसके लिए को बिल्कुल पूरी तरीके से ढके हुए हैं| विजय राघव गढ़ किले कि ऊपर आक्रमण करने से पहले विरोध ही राजा की नीतियां काम करना बंद कर देती थी क्योंकि यह किला बहुत ही सुरक्षित था | प्रयाग दास राजा के पुत्र सरयू प्रसाद का इस किले के ऊपर शासन था | 1857 की क्रांति के समय अंग्रेजी अधिकारी कमिश्नर के ऊपर गोली दाग देने से क्रांति पूरी तरीके से भड़क गई थी जिस कारण से यहां पर भी बहुत भारी मात्रा में आंदोलन हुआ था |

Katni GK History in hindi

विजय राघव गढ़ किले की दीवारों की नक्काशी कुछ इस तरीके से है कि आप देखेंगे तो एकदम हक्के बक्के रह जाएंगे क्योंकि वर्तमान में ऐसा कोई भी कारीगर उस तरीके की कारीगरी नहीं कर सकता | प्राचीन काल के आर्किटेक्चर कुछ विशेष तरीके से इमारतों का निर्माण किया करते थे उनकी सोच में इतनी मजबूती हुआ करती थी की इमारत के निर्माण के बाद लाखो वर्ष इमारत जैसी की तैसी ही रहती है | प्राचीन काल की बहुत सी इमारत है आज भी हजारों वर्ष पुरानी हो गई थी परंतु उनका कुछ भी नहीं बिगड़ा क्योंकि बड़ी सूझबूझ से और नक्काशी से उन इमारतों का निर्माण किया जाता था|

🌗 स्टोन पार्क-

कटनी जिले के स्लीमनाबाद में प्रसिद्ध स्टोन पार्क स्थित है जो बहुत ही खूबसूरत है | वर्तमान समय में इसका विस्तार काफी बड़े रूप में किया जा रहा है |

🌗 माधवगढ़ –

कटनी जिले के अंतर्गत माधवगढ़ के नाम से एक बहुत ही खूबसूरत पर्यटक स्थल है यहां पर आपको प्राचीन काल में पृथ्वीराज चौहान और आल्हा ऊदल के साथ है हुई लड़ाई की जानकारी प्राप्त होती है| कहां जाता है कि माधवगढ़ की अंतर्गत ही पृथ्वीराज चौहान और आल्हा ऊदल का विशाल युद्ध हुआ था | माधवगढ़ के अंतर्गत बहुत से ऐसे साक्ष्य प्राप्त होते हैं जिनके माध्यम से पृथ्वीराज चौहान और आल्हा ऊदल की लड़ाई का अंदाजा लगाया जा सकता है |

🌗 झिंझरी गांव-

कटनी जिले के अंतर्गत इस गांव में कुल मिलाकर पाषाण काल की 14 चट्टाने प्राप्त की गई है | पाषाण काल की इन्हीं चट्टानों को देखने के बाद पाषाण काल की पुष्टि होती है और पाषाण काल की बहुत सी जानकारी प्राप्त होती है |

🌗 कैमूर पहाड़ी-

दोस्तों यह पहाड़ी बहुत ही खूबसूरत पहाड़ी है क्योंकि यहां पर आप मध्यप्रदेश में बहने वाली केन नदी का उद्गम स्थल देख सकते हैं जहां पर बहुत ही सुंदर लगता है | यहां पर के नदी एक छोटे से कुंड के रूप में निकल कर आगे बढ़ती है | यह पहाड़ी बरसात के समय में बहुत ही आकर्षक और मन को आनंदित कर देने वाली बन जाती है क्योंकि उस समय यहां पर आपको केन नदी के साथ-साथ कई छोटे-छोटे झरने दिखाई देते हैं |

चारों तरफ का वातावरण एकदम सुंदर और स्वच्छ दिखाई देता है यहां पर बहने वाली हवा आपके मन को आनंदित कर देने वाली हवा है | आप यदि ऐसे स्थान पर जाते हैं तो आपको प्रकृति की कुछ सुंदरता और उसके रहस्य दिखाई देते हैं इस रहस्य के अलावा भी प्रकृति के कई ऐसे रहते हैं जिनके बारे में जानने के लिए हमें कठिन से कठिन रास्ते से होकर गुजरना होता है|

🌗 बहोरीबंद-

कटनी जिले के अंतर्गत आने वाला बहोरीबंद एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है जहां पर भगवान शिव की पांच लिंगीय प्रतिमा देखने को मिलती है |

🌗 भगवान नरसिंह मंदिर टांगवान-

कटनी जिले के अंतर्गत भगवान नरसिंह का प्रसिद्ध मंदिर है जो भगवान विष्णु के लिए समर्पित है नरसिंह भगवान को भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है | यह मंदिर काफी पुराना और प्रसिद्ध मंदिर है हिंदू धर्म की आस्था का केंद्र है यहां पर प्रतिदिन लोग नरसिंह भगवान के दर्शन करने के लिए आते हैं |

🌗 भगवान शांतिनाथ मंदिर-

कटनी जिले के अंतर्गत जैन धर्म से जुड़ा हुआ एक प्रसिद्ध मंदिर देखने को मिलता है जिसमें भगवान शांतिनाथ की 12 फीट ऊंची प्रतिमा को देखा जा सकता | जैन धर्म से जुड़ा हुआ यह मंदिर काफी सुंदर और विशाल मंदिर है यहां पर आपको सभी प्रकार की सुविधा देखने को मिल जाती है | यदि आप दूर से आते हैं तो आपको ठहरने की संपूर्ण व्यवस्था और होटल की व्यवस्था यहां पर उपलब्ध करा दी जाती है | जैन धर्म के त्यौहारों और पर्वों पर इस मंदिर में सबसे ज्यादा मात्रा में जैन समुदाय की भीड़ एकत्रित होती है और इसके अलावा भी अन्य धर्मों के लोग भी उनके आयोजन में हिस्सा लेते हैं |

🌗 भारत का भौगोलिक केंद्र बिंदु-

दोस्तों जब भी हम भौगोलिक की बात करते हैं तो हमारे दिमाग में यही आता है कि भारत के हम संपूर्ण विभाग की बात करते हैं जिसमें हम भारत के पूर्व पश्चिम उत्तर और दक्षिण सभी अंतिम बिंदुओ के बारे में चर्चा करते हैं | दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं भारत की कुल मिलाकर 8 राज्यों से कर्क रेखा गुजरती है जिसमें से मध्य प्रदेश भी एक राज्य है | कटनी जिले के अंतर्गत एक छोटा सा गांव जिसे करौंदी के नाम से जाना जाता है यह गांव ढीमरखेड़ा तहसील के अंतर्गत आता है | करौंदी गांव का अपना एक विशेष महत्व है क्योंकि इसी गांव से होकर कर्क रेखा गुजरती है | करौंदी गांव की आबादी तो ज्यादा नहीं है परंतु इस गांव को ही भारत का केंद्र बिंदु माना जाता है |

सन 1956 से पहले करौंदी गांव भारत का केंद्र बिंदु नहीं हुआ करता था 1956 के समय जबलपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज के कई छात्रों ने इस स्थान की खोज की इसके बाद ही इसे भारत का केंद्र बिंदु घोषित किया गया |

🌗 रूपनाथ धाम Katni

रूपनाथ धाम के अंतर्गत आपको प्रमुख रूप से गुफाएं देखने को मिलते हैं और यहां पर आपको इन्हीं गुफाओं में भगवान शिव की प्रसिद्ध शिवलिंग देखने को मिलती है जोकि बहुत प्रसिद्ध है | यहां पर आपको प्राकृतिक कुंड देखने को मिलते हैं जिनमें कंचन जल भरा रहता है यह जल कभी भी खाली नहीं होता | यहां पर चारों तरफ का वातावरण एकदम स्वस्थ और सुंदर दिखाई देता है | यह धाम जंगल के बीचो -बीच स्थित है यहां पर आपको सम्राट अशोक के अभिलेख भी मिलेंगे जिनको कहा जाता है कि यह सम्राट अशोक के पहले ऐसे अभिलेख हैं जिनमें सम्राट अशोक का नाम स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है |

यह एक प्रकार के धार्मिक स्थल है और पुरातत्व महत्व का भी है क्योंकि यहां पर पुरातन की चीजें सर्वाधिक मात्रा में मौजूद हैं | यह धाम बहोरीबंद तहसील के अंतर्गत आता है | यहां पर मौजूद सम्राट अशोक के शिलालेख के माध्यम से पता चलता है कि आज से करीब 232 ईसा पूर्व सम्राट अशोक रूपनाथ स्थान पर कुछ समय के लिए रुके थे | भारत के ऐसे स्थल जहां पर सम्राट अशोक की अभिलेख प्राप्त हुए हैं कहा जाता है कि उन्हें स्थलों पर सम्राट अशोक स्वयं कुछ समय के लिए निवासरत रहे हैं |

कहा जाता है कि यहां पर प्रमुख रूप से 3 कुंड देखने को मिलते हैं जिनको भगवान श्री राम ,लक्ष्मण और सीता तीनों के नाम पर अलग-अलग कुंडो के नाम भी रखे गए हैं | रूपनाथ धाम प्रदेश का एक ऐसा चर्चित और प्रसिद्ध धाम है जिसकी चर्चा प्रदेश के बाहर भी लगी रहती है | रूपनाथ धाम भगवान शिव के कारण ही प्रसिद्ध है रूपनाथ धाम के बुजुर्ग पुजारियों के द्वारा बताया जाता है कि बांदकपुर में स्थित भगवान शिव रूपनाथ धाम से ही पहुंचे थे | रूपनाथ धाम से ही भगवान शिव को बांदकपुर ले जाया गया था |

रूपनाथ धाम Katni

🌗 भगवान विष्णु मंदिर-

कटनी जिले से लगभग 42 किलोमीटर की दूरी पर भगवान विष्णु के लिए समर्पित यह मंदिर काफी पुराना और ऐतिहासिक मंदिर है इस मंदिर में आपको भगवान विष्णु के वराह अवतार की मूर्ति देखने को मिलती है यह मूर्ति बहुत ही पुरानी मूर्ति है | भगवान विष्णु की प्रतिमा जो कि 12 अवतार में स्थापित है पांचवी सदी की मूर्ति है | भगवान विष्णु का यह मंदिर यहां के कारीतलाई नामक गांव के अंतर्गत आता है | दोस्तों यह मंदिर विंध्य पर्वत के अंतर्गत ही आता है क्योंकि कटनी जिला का संपूर्ण हिस्सा विंध्य पर्वत के क्षेत्र के अंतर्गत आता है |

दोस्तों यहां पर सबसे अधिक मात्रा में हिंदू धर्म से जुड़े हुए देवी-देवताओं की प्राचीन काल की मूर्तियों को देखा जा सकता है| यहां पर आपको भगवान विष्णु, भगवान श्री गणेश ,माता पार्वती की ऐसी प्रसिद्ध मूर्तियां देखने को मिलती है जिनको आप बोलता हुआ महसूस करेंगे | दोस्तों यहां पर कुछ अभिलेख भी प्राप्त हुए हैं और जो मूर्तियां प्राप्त हुई है उनके बारे में कहा जाता है कि यह लगभग 493 ई. पुरानी मूर्ति हैं |

दोस्तों यह एक ऐसा पर्यटक स्थल है जहां पर हिंदू देवी देवताओं की अधिकतर अवशेष देखने को मिलते हैं | यह पर्यटक स्थल काफी दुर्गम स्थलों के बीच बसा हुआ है परंतु यहां पर लोग अक्सर पहुंच जाते हैं |

🌗 संकट मोचन मंदिर कटनी-

मुहांस संकट मोचन मंदिर के नाम से प्रसिद्ध यह मध्य प्रदेश का काफी प्राचीन मंदिर है जहां पर हजारों की संख्या में लोग प्रतिदिन भगवान श्री हनुमान जी के दर्शन करने के लिए आते हैं | कटनी जिले के अंतर्गत रीठी तहसील के निकट यह धार्मिक मंदिर स्थित है जहां पर लोगों की आस्था और विश्वास वर्षों से कायम है | हिंदू धर्म का यह मंदिर जिले के लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर दमोह रोड पर स्थित है |

आज से लगभग 50 साल से यहां पर लोगों की आस्था और विश्वास जुड़ा हुआ है क्योंकि कहा जाता है कि यहां पर टूटी-फूटी छोटी मोटी हड्डी भगवान श्री हनुमान जी के दरबार में माथा टेक देने से चुटकियों में ठीक हो जाती है | इसके बारे में आप अपने आसपास के किसी ऐसे व्यक्ति के द्वारा पता कर सकते हैं जो कभी इस मंदिर में गया हो | दोस्तों ऐसा कहा जाता है कि हड्डी टूटने के बाद हमेशा मरीज को डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए लेकिन कभी-कभी हम ऐसे धार्मिक स्थलों के बारे में जानते हैं जो कि बिल्कुल सत्य प्रमाण दिखाते हैं | दोस्तों भले ही कोई इस मंदिर के बारे में ना मानता हूं लेकिन यह बिल्कुल सच है कि यहां पर लोगों को तुरंत आराम और राहत मिल जाती है रोता हुआ व्यक्ति वहां से हंसता हुआ वापस आता है |

🔲 मोहांस मंदिर का निर्माण-

इस मंदिर के निर्माण में लगभग 2 साल का वक्त लगा इस मंदिर का निर्माण 1984 से शुरू हुआ और मंदिर पूरी तरीके से 1986 में बनकर तैयार हुआ | मंदिर के निर्माण के बाद दर्शकों के लिए भगवान श्री हनुमान जी के द्वार हमेशा के लिए खोल दिए गए| ऐसा मंदिर के परिसर में आपको बैठने के लिए धर्मशाला देखने के लिए मिलेगी जिसमें हजारों लोग आराम से बैठ सकते हैं | यहां पर बहुत अच्छा लगता है आप अपने पूरे परिवार के साथ भगवान श्री हनुमान जी के दर्शन करने के लिए आ सकते हैं |

🌗 मां जालपा मंदिर कटनी-

कटनी जिले के सभी मंदिरों में मां जालपा माता का मंदिर यहां का प्रमुख मंदिर है जो हिंदू धर्म के लिए प्रसिद्ध है | मां जालपा माता के बारे में कई कहानियां सुनने को मिलते हैं कहा जाता है कि जहां पर मां जालपा प्रकट हुई थी वहां पर पहले बांस का घना जंगल हुआ करता था | माता शक्ति की एक खंडपीठ मां जालपा के नाम से प्रसिद्ध है यहां पर हजारों की संख्या में लोग अपने मनोकामना लेकर माता के दरबार में आते हैं | प्रदेश के कोने-कोने से आए हुए लोगों की हर मनोकामना को माता के द्वारा पूरा किया जाता है |

मां जालपा माता माता के अलावा यहां पर किसी अन्य देवी देवताओं की मूर्ति नहीं थी परंतु 50 वर्ष पहले यहां पर राजस्थान के जयपुर से मां कालका , मां जालपा और शारदा के साथ है तीनों देवियों को यहां पर स्थापित किया गया | दोस्तों सबसे ज्यादा भीड़ तो नवरात्रि के समय पर होती है परंतु हजारों लोग तो यहां पर बिना मौसम किसी भी समय किसी भी त्यौहार के बिना ही माता के दर्शन करने के लिए आते रहते हैं | धार्मिक पुराणों और ग्रंथों के अनुसार बताया जाता है कि मां जालपा की कृपा पाने के लिए थोड़ी सी तपस्या तो करनी ही पड़ती है परंतु जिस भी व्यक्ति के ऊपर मां जालपा की कृपा बरसती है वह धन्य हो जाता है |

🌗 ऊमर डोली बांध-

कटनी जिले का यह एक प्रमुख बांध है जो कि वास्तव में बहुत ही सुंदर लगता है क्योंकि सर्वाधिक एरिया कटनी का जंगल का एरिया है यहां पर हमेशा हरा-भरा और खूबसूरत लगता है | इस बांध के निर्माण में लगभग 10 साल से अधिक लग चुके थे | जवान 100 से भी अधिक वर्ष का हो चुका है |

Katni railway junction

कटनी जिले से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण सवाल और जवाब Some important questions and answers related to Katni district FAQ’s

▶️ कटनी जिले का पुराना नाम क्या है?

कटनी जिले का पुराना नाम मुड़वारा है|

▶️ कटनी जिला कब बना?

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले की सीमाओं में संशोधन कर दें 25 मई 1998 को कटनी जिला बनाया गया |

▶️ कटनी क्यों प्रसिद्ध है?

कटनी मध्य प्रदेश का एकमात्र ऐसा जिला है जहां पर चूना पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है जिस कारण से कटनी को चूना नगरी भी कहा जाता है |

▶️ मध्य प्रदेश के किस गांव को जोगिनी के नाम से जाना जाता है?

कटनी जिले के सिंदुरसी नामक गांव को योगिनी के नाम से जाना जाता है यह गांव काफी चर्चित और प्रसिद्ध गांव हैं |

▶️ ठगी प्रथा का अंत किसने किया था?

ठगी प्रथा का अंत कर्नल स्लीमन के द्वारा किया गया था कर्नल स्लीमन के नाम पर ही कटनी जिले का एक प्रसिद्ध स्थल स्लीमनाबाद है ,जो कि बहुत ही प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है |

▶️ केन नदी का उद्गम कहां से होता है?

मध्यप्रदेश में बहने वाली केन नदी का उद्गम कटनी जिले के कैमूर पहाड़ी से होता है |

▶️ ACC सीमेंट कंपनी की स्थापना कब हुई?

ACC सीमेंट कंपनी की स्थापना सन 1923 में हुई यह कंपनी कटनी जिले में ही स्थापित की गई | इस कंपनी के द्वारा निर्मित किया जाने वाला सीमेंट प्रदेश के कई हिस्सों में एक्सपोर्ट किया जाता है |

Katni GK History in hindi

▶️ आईने-ए- अकबरी किसकी पुस्तक है?

यह पुस्तक अबुल फजल की है कहा जाता है कि कटनी जिले की विलहाटी का संपूर्ण वर्णन इसी पुस्तक में किया गया है | अबुल फजल की आईने-ए- अकबरी पुस्तक में बिल्हा टीकू पुष्पावती नगर के नाम से दर्ज किया गया है |

▶️ जागृति पत्रिका कहां से निकलती है?

कटनी जिले से प्रकाशित होने वाली जागृति पत्रिका पूरे मध्यप्रदेश की प्रसिद्ध पत्रिका है यह पत्रिका राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका है |

▶️ भारत की पहली किन्नर महापौर कौन थी?

भारत की पहली किन्नर महापौर जिनको” कमला जान” के नाम से जाना जाता है यह मध्य प्रदेश के कटनी जिले से संबंध रखती हैं |

▶️ रूपनाथ अभिलेख कहां पर स्थित हैं?

कटनी जिले की स्थापना से पहले रूपनाथ अभिलेख जबलपुर जिले के अंतर्गत आता था लेकिन 25 मई 1998 के बाद कटनी जिले को जबलपुर से पृथक कर दिया गया तब से रूपनाथ अभिलेख कटनी जिले के अंतर्गत आता है | रूपनाथ अभिलेख पाली भाषा में लिखा हुआ अशोक का अभिलेख है जो कि एक महान सम्राट हुआ करते थे|

▶️ मध्य प्रदेश के किस जिले में विजय राघव गढ़ का किला स्थित है?

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में विजय राघव गढ़ का किला स्थित है यह किला काफी प्राचीन और ऐतिहासिक किला है | विजय राघव गढ़ किले के अंतर्गत एक रंग महल बना हुआ है जो कि बहुत ही सुंदर और प्रसिद्ध महल है |

▶️ कटनी जिले के अंतर्गत कितनी तहसील आती हैं?

कटनी जिले में कुल मिलाकर 7 तहसीलें हैं|

▶️ ठगी प्रथा का क्या अर्थ है?

दोस्तों ठगी प्रथा कोई दुकानदार और दुकानदार से खरीदने वाली कोई प्रथा नहीं है जिससे ग्राहक को ठगा जाए | दोस्तों जहां तक अगर प्रथा की बात करें तो इसका अर्थ होता है रीति अर्थात नियम| प्राचीन काल से ही किसी महान शासक के शासनकाल में ठगी प्रथा जैसी प्रथा को किसी राज्य में शुरू कर दिया गया तो कभी-कभी यह प्रथा समाप्त होने का नाम ही नहीं लेती | इस प्रकार की कठिन प्रथा को समाप्त करने के लिए कभी ना कभी कोई व्यक्ति आगे आता है और इसका विरोध करता है तब कहीं जाकर ऐसी प्रथा को रोका जाता है समाप्त किया जाता है | ज्यादातर ऐसी प्रथाओं को समाप्त किया जाता है जो जनता के हित में ना हो |

ठगी प्रथा का अर्थ है कि जो भी राहगीर रात को अथवा दोपहर को अथवा किसी भी समय अकेले रास्ते में मिलते थे उनको कुछ बदमाशों के द्वारा लूट कर पीटा जाता था अथवा कभी कभार जान से भी मार दिया जाता था |

▶️ मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा सीमेंट कारखाना कौन सा है?

ACC सीमेंट कारखाना मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा कारखाना है यह कारखाना 8 छोटी-छोटी सीमेंट कंपनियों से निर्मित है |

▶️ सम्राट अशोक का सबसे पहला अभिलेख कहां पर प्राप्त हुआ था |

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में प्राप्त होने वाला रूपनाथ अभिलेख सम्राट अशोक का पहला ऐसा अभिलेख था जिसमें सम्राट अशोक का नाम स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है |

Read more –

Leave a Comment